बाहों में तेरी महफूज़ रहती थी,
रातों में तुझे ही पकड़ कर सोती थी,
अंधेरे में तेरे आंचल में छुप जाती थी,
दीवारों पर अपने हाथ छाप कर चली जाती थी,
फिर उन्हीं शरारतों के लिए तुझसे डांट खाती थी,
तेरी कहानियों में कहीं खो जाती थी,
तेरे पास लेटे-लेटे न जाने कब सो जाती थी,
समय के साथ वो सारी यादें धुंधली हो गई है,
जिन्दगी की राहों में चलते-चलते तेरी उंगली छूट गई है,
इस दुनिया की दिक्कतों में न जाने मेरी शरारतें कहां खो गई हैं,
देख मां आज वो तेरी नन्ही सी जान बड़ी हो गई है।
